जीत का श्रेय

१६ (16) मई को लोक सभा चुनाव के नतीजे घोषित किए गए थे और कांग्रेस पार्टी ने सफ़लता प्राप्त की । इस सफ़लता का सारा श्रेय श्रीमति सोनिया गाँधी के सपूत, राहुल गाँधी को दिया गया । सब तरफ इसी बात कि चर्चा थी कि कैसे राहुल ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को अकेले चुनाव में खड़ा करवाया । रातों-रात राहुल गाँधी एक नए, महान राजनेता के रूप में देखे जाने लगे ।

पर कहीं सब भूल गए थे कि यह वही राहुल गाँधी है जिन्होंने कहा था कि उनके परिवार कि सबसे बड़ी उपलब्धि पाकिस्तान का बंटवारा है । यह वही राहुल गाँधी है जिनके ऊपर एक ब्रिटिश मंत्री को दरिद्रता पर्यटन पर ले जाने का आरोप लगा था ।

यकीनन यह कहना सही होगा कि राहुल भी अपने पिता कि तरह दूरदर्शी हैं पर उनकी तरह जल्दबाज़ नहीं । राहुल में वह हर गुण का सही मिश्रण है जो एक सफ़ल राजनेता में होने चाहिए । पर इस सबके बावजूद उन्हें कांग्रेस कि जीत का श्रेय देना गलत होगा । हम वह पल भूल रहे हैं, जब १९९८ (1998) में Edvige Antonia Albina Maino, उर्फ़ सोनिया गाँधी ने कांग्रेस में प्रवेश किया । उस समय और उसके काफी समय बाद भी उन्हें भारतीय मूल का न होने की फटकार सहनी पड़ी । पर इस औरत ने हार नहीं मानी । एक ऐसा समय था जब वह हिंदी बोलने में लड़खड़ाती थी और एक आज का समय है जब वह साड़ी पहनकर घूमती है और किसी से कम भारतीय नहीं लगती ।

जिस खूबी से सोनिया गाँधी ने अपने आप को भारतीय रंग में ढाला है और अपने आप को हर विवाद से दूर कर दिया है, उसकी दाद देनी होगी । चुप-चाप वह यू.पी.ए. की प्रमुख बन चुकी हैं और देश की प्रधान मंत्री या राष्ट्रपति न होने के बावजूद, देश को अपनी मुट्ठी में कर चुकी हैं । यही उनका ब्रह्मास्त्र है । अब हमें उनके विदेशी मूल कि होने की चर्चा शायद ही सुनने को मिलती है क्यूंकि उन्होंने यह दिखाना ही छोड़ दिया है कि वह देश पर राज करना चाहती है । अगर अब वह विदेशी भी हैं तो उससे किसी को क्या फर्क ?

दूसरी चाल जो सोनिया गाँधी ने चल दी है वह यह है कि राहुल गाँधी को पूरे जोर-शोर से एक काबिल और सफ़ल नेता दिखने का कम कर चुकी हैं । राहुल राजीव का पुत्र है इसलिए वह पूरा भारतीय है । अगर राहुल गाँधी प्रधान मंत्री पद के लिए भी खड़े होते हैं तो कोई भी उन्हे विदेशी नहीं कह सकता । वह मेरी तरह भारत के हे नागरिक हैं ।

इसलिए मेरा सोचना यह है कि पूरा देश राहुल गाँधी कि जय-जयकार कर रहा है; और यही सोनिया गाँधी चाहती थी । कांग्रेस कि सफ़लता कि असली वास्तुकार तो वह हैं । हर बारी कि तरह विवाद से बचने के लिए नाम राहुल का लिया जा रहा है । मैं इस बात पर तो शायद ही कोई टिपण्णी दे सकूँ कि राहुल गाँधी कितने योग्य नेता हैं । पर अगर वह थोड़े भी अपनी माँ कि तरह हैं, तो उनका सफ़ल होना निश्चित है ।

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